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पांच कमरे से 50 हजार रूपए माह की आमदनी

अशोक प्रियदर्शी
किसी देहात में पांच कमरे हो। और उस कमरे से 50 हजार रूपए महीने की आमदनी हो। आमतौर पर ऐसा यकीन करना बहुत मुश्किल होता है। लेकिन यह सोलह आना सच है। ऐसा चमत्कार देखना हो तो बिहार के नवादा जिला मुख्यालय से कोई दस किलोमीटर दक्षिण डेरमा गांव में खुली आंखों से देखा जा सकता है। डेरमा गांव निवासी मंुशी सिंह के 38 वर्षीय पुत्र मनोज कुमार मशरूम की खेती को अपनाकर कुछ ऐसा ही कमाल कर रहे हैं। यह कमाल अपने घर के बेकार पड़े पांच कमरों से कर रहे हैं।
उन कमरों में मशरूम की खेती और बीज उत्पादन का प्लांट लगाया है। इस खेती से प्रतिमाह 50 हजार रूपए की आमदनी हो रही है। मनोज अब दूसरों किसानों के लिए भी प्रेरणास्त्रोत बन गए हैं। ऐसा नही कि मनोज यह कामयाबी बहुत आसानी से हासिल की है। इसके पहले मनोज गांव में मुर्गीपालन शुरू किया था। लेकिन उसमें बहुत लाभ नही हो रहा था। तब प्रयोग के तौर पर छोटा सा कमरा में मशरूम की खेती शुरू किया था, जो पहले ही खेती में लाभकारी साबित हुआ।
एएन काॅलेज पटना से बीएससी आॅनर्स मनोज बताते हैं कि पढ़ाई के दौरान मशरूम की खेती के बारे मे पढ़ा था। चार साल पहले दो हजार रूपए की पूंजी से मषरूम की खेती किया था, जिसमें करीब 10 हजार का मुनाफा हुआ था। तब अगले साल 80 हजार रूपए की पूंजी से मषरूम की खेती किया। अब स्थिति यह है कि उनकी पूंजी 15 लाख से अधिक हो गई है। यही नहीं, मनोज राज्य सरकार की मदद से 15 लाख रूपए की लागत से मषरूम के बीज उत्पादन का प्लांट स्थापित किया।
मशरूम की बिक्री की कोई समस्या नही है। दवा बनानेवाली कंपनी मशरूम वल्र्ड उसके मशरूम को खरीद रही है। बीज की बिक्री भी स्थानीय स्तर पर हो जा रही है। खास बात यह कि इसके लिए नही ज्यादा पूंजी, नही अधिक मेहनत और नही ज्यादा भूभाग की आवश्यकता होती है। मामूली पूंजी से जर्जर कमरे में भी मशरूम की खेती की जा सकती है।
कृषि विज्ञान केन्द्र सेखोदेवरा के समन्वयक ई. शैलेन्द्र किशोर मिश्र कहते हैं कि गांवों में किसानों की जोत और आमदनी में कमी हो रही है, जिससे किसान खेती से विमुख हो रहे हैं। वैसे में मशरूम, मुर्गीपालन, औषधीय पौध, शब्जी उत्पादन किसानों की खुशहाली का आधार बन सकता है। मनोज ऐसेे ही मिसालों में से एक हैं।
बहरहाल, मनोज की तरक्की का असर परिवार में भी बखूबी दिख रहा है। मनोज के पुत्र अमितेष की पढ़ाई पटना सेन्ट्रल स्कूल में हो रही है। मनोज कहते हैं कि पूरी निष्ठा से कोई भी काम किया जाय तो सफलता मुश्किल नही।

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