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65 हजार की नौकरी ठुकरा किसानों के लिए बनाए गैसी फायर डीजल इंजन

सर्वेश  गौतम।
         नवाादा जिले के समाय निवासी नवीन कुमार सिंह 52 वर्ष के हो गए हैं। वे दरभंगा इंजीनियरिंग काॅलेज से सिविल इंजीनियरिंग कर चुके हैं। लेकिन इंजीनियरिंग करने के बाद कहीं नौकरी के लिए अप्लाई नहीं किया। 10 साल पहले हस्क पावर कम्पनी से नौकरी का आॅफर आया था। लेकिन नौकरी नहीं की।
  – बचपन से रहा इनोवेशन का शौक इसलिए नौकरी नहीं की
       वे बताते हैं कि बचपन से ही कुछ न कुछ बनाते रहने का शौक रहा है। इंजीनियरिंग करने के दौरान भी काॅलेज में कुछ न कुछ बनाते रहा जिससे काॅलेज में लोकप्रिय था। उस दौरान जब भी बाजार जाता तो कपड़े खरीदने या अन्य शौक में रूपए खर्च करने की जगह इंजीनियरिंग टूल्स खरीद लेता। इसके लिए सहपाठह मजाक भी उड़ाते थे। इंजीनियरिंग करने के बाद परिवार से नौकरी करने का दबाव दिया गया,लेकिन इच्छा नहीं हुई।
किसानों के लिए बनाया भूसी से चलने वाला पम्प सेट
        घर लौटने के बाद सबसे पहले गैसीफायर से डीजल पम्प सेट चलाने के लिए गैसी फायर बनाया। गैसी फायर से चलने वाले पम्प सेट में 3-4 किलो भूसी में 3 घंटे तक पम्पसेट को चलाया जा सकता था। इसमें डीजल की खपत नाम मात्र के होती थी। उन्होनें बताया कि गांव में इसे ले जाकर चलाया तो लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। कई लोग इसके लिए मजाक भी उड़ाए लेकिन अपने काम में लगा रहा। उन्होनें कहा कि मेरे पास आज भी ऐसे ऐसे टूल्स है जो नवादा में शायद ही किसी इंजीनियर या कम्पनियों में हो।
 – गांव के लोगों को धूंआ से निजात व गैस से भी सस्ते इंधन के लिए बनाया हस्क चूल्हा
         गांव की अधिकांश महिलाएं आज भी धूएं वाली चूल्हे पर खाना बनाती है। गांव की महिलाओं की सुविधा एवं किसानों को ध्यान में रखकर हस्क चूल्हा का निर्माण किया। हस्क चूल्हा में गैस इंधन से भी कम खर्च आता है। नवीन सिंह बताते हैं कि हस्क चूल्हा धान की भूसी से चलता है। इसमें एक किलो भूसी से 5 लोगों का भोजन आराम से बनाया जा सकता है। बाजार में भूसी महज 4-5 रूपए किलो आसानी से उपलब्ध हो जाता है। सबसे आश्चर्य यह है कि इसमें धूंआ कुछ भी नहीं निकलता है जबकि गैस से भी तीव्र लौ यह प्रदान करता है। हालांकि इसके निर्माण में लगभग 3 हजार रूपए खर्च हो जाता है। जबकि गांव के लोग इतने रूपए खर्च नहीं करना चाहते हैं। अगर इसमें सब्सीडी मिले तो गांव के लोग आसानी से हस्क चूल्हा का इस्तेमाल कर सकते हैं।
– ज्ञानेश पाण्डेय से मिली थी नौकरी के लिए आॅफर
          ज्ञानेश पाण्डेय की पटना में हस्क पावर कम्पनी है। वे अपने गांव बेतिया में जेटरोफा से तेल निकालकर पूरे गांव में बिजली सप्लाई करना चाहते थे। लेकिन यह बडे पैमाने पर संभव नहीं था। उनसे पहले से सम्पर्क  था। उसी वक्त उनसे गैसी फायर से बिजली उत्पादन के लिए चर्चा किया। उन्होनें इसके लिए हामी भर दी। लगभग एक साल की मेहनत से भूसी से चलने वाला शत प्रतिशत गैस इंजन का निर्माण किया। इससे 20 किलोवाट बिजली उत्पादन हाोने लगा। इसी से खुश होकर ज्ञानेश पाण्डेय ने अपनी कम्पनी में 65 हजार की नौकरी के लिए आॅफर दिया,लेकिन मना कर दिया।

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